ज्ञानवीर विश्वविद्यालय में शान से लहराया तिरंगा, राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा विश्वविद्यालय परिसर

राजेश साहू चैनल हेड

आकाश सिंह राजपूत एवं कुलपति आदित्य सिंह राजपूत ने किया ध्वजारोहण, 100 से अधिक पौधों का रोपण और निकाली विशाल तिरंगा यात्रा

सागर,दिनांक 16 अगस्त 2026। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ज्ञानवीर विश्वविद्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह अत्यंत हर्षोल्लास, गौरव और राष्ट्रभक्ति के वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में युवा शक्ति संगठन के अध्यक्ष आकाश सिंह राजपूत एवं ज्ञानवीर विश्वविद्यालय के कुलपति आदित्य सिंह राजपूत ने संयुक्त रूप से ध्वजारोहण कर राष्ट्रध्वज को सलामी दी। इस दौरान पूरा विश्वविद्यालय परिसर भारत माता के जयघोष और राष्ट्रभक्ति के नारों से गूंज उठा।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ज्ञानवीर विश्वविद्यालय परिवार द्वारा पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का संदेश देते हुए 100 से अधिक पौधों का वृक्षारोपण किया गया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में विशाल तिरंगा यात्रा निकाली गई, जिसमें विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, स्टाफ एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। तिरंगा यात्रा के माध्यम से आमजन को राष्ट्रप्रेम, देश के प्रति जिम्मेदारी और राष्ट्रीय एकता के प्रति जागरूक किया गया।

“ज्ञानवीर यूनिवर्सिटी हम सबका परिवार है”ःकुलपति आदित्य सिंह राजपूत

इस अवसर पर ज्ञानवीर विश्वविद्यालय के कुलपति आदित्य सिंह राजपूत ने अपने संबोधन में कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि उन महान स्वतंत्रता सेनानियों और वीर शहीदों के त्याग, तपस्या और बलिदान को स्मरण करने का अवसर है, जिनके कारण आज हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं। उन्होंने कहा, “ज्ञानवीर यूनिवर्सिटी हम सबका परिवार है। इस परिवार का प्रत्येक सदस्य विश्वविद्यालय की प्रगति के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हमारा दायित्व है कि हम विद्यार्थियों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी दें।”

कुलपति ने कहा कि आज पूरा देश स्वतंत्रता दिवस के गौरवपूर्ण अवसर को मना रहा है। हमें अपने स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का भारत बनाने के लिए ईमानदारी, मेहनत और समर्पण के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार सहित सभी देशवासियों को 80वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। वृक्षारोपण अभियान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है। “एक पौधा केवल पेड़ नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन और स्वच्छ भविष्य की नींव है। हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम अधिक से अधिक पौधे लगाएं और उनकी देखभाल भी करें।”

“राष्ट्र के प्रति समर्पण और सेवा ही हमारा धर्म”ःआकाश सिंह राजपूत

युवा शक्ति संगठन के अध्यक्ष आकाश सिंह राजपूत ने अपने संबोधन में कहा कि तिरंगा हमारी आन, बान और शान का प्रतीक है। इसके तीन रंग और अशोक चक्र हमें त्याग, शांति, समृद्धि, निरंतर कर्म और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों की याद दिलाते हैं। उन्होंने कहा, “स्वतंत्रता हमें हमारे वीर शहीदों के बलिदान से मिली है। आज हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस स्वतंत्रता की गरिमा को बनाए रखें और देश की प्रगति में अपना योगदान दें। राष्ट्र के प्रति समर्पण और उसकी सेवा ही हमारा धर्म है।”

आकाश सिंह राजपूत ने विश्वविद्यालय परिवार से आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाए और अधिक से अधिक वृक्ष लगाए। उन्होंने कहा कि “जिस प्रकार हम अपने घर और परिवार की चिंता करते हैं, उसी प्रकार हमें अपनी धरती और पर्यावरण की भी चिंता करनी चाहिए। आज लगाया गया एक पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी सबसे खूबसूरत विरासत बन सकता है।”उन्होंने सभी विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है। यदि युवा शिक्षा, संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के साथ आगे बढ़ेंगे तो भारत को विश्व के अग्रणी देशों की पंक्ति में पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता।

कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के कुलगुरु महेश शुक्ला, उपकुलगुरु प्रोफेसर मनोज, मनीष जैन, आशुतोष सिंह, डॉ. राजकृष्ण, शेखर पाठक, गोविंद दुबे, श्रीमती एन.सी. स्टेफी सहित विश्वविद्यालय के पदाधिकारी, अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। समारोह के अंत में सभी ने राष्ट्र की एकता, अखंडता, पर्यावरण संरक्षण और देश के विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। स्वतंत्रता दिवस का यह आयोजन राष्ट्रभक्ति, पर्यावरण संरक्षण और युवा शक्ति के संकल्प का प्रेरणादायी संदेश बनकर

सामने आया।

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