राजेश साहू चैनल हेड
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बंडा। बंडा में सामने आए शराब प्रकरण के बाद चंदू राजा राजपूत का नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ बयानों में उन्हें मंत्री गोविंद सिंह राजपूत का रिश्तेदार बताया जा रहा है, जबकि कुछ लोगों द्वारा उन्हें पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह का करीबी बताया जा रहा है। हालांकि, सामने आ रही तस्वीरों और उपलब्ध जानकारी को देखने पर मामला इससे कहीं अधिक अलग और पेचीदा नजर आता है।
चंदू राजा राजपूत की अलग-अलग समय की तस्वीरें सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर उनकी राजनीतिक नजदीकियां किसके साथ रही हैं। एक तस्वीर में वह उस समय पूर्व गृह मंत्री रहे भूपेंद्र सिंह के यहां नजर आ रहे हैं। तस्वीर में उनके साथ भूपेंद्र सिंह के भतीजे भी दिखाई दे रहे हैं। इससे उनके पूर्व मंत्री के परिवार से संपर्क होने की बात सामने आती है, लेकिन केवल किसी नेता के साथ तस्वीर होने के आधार पर किसी को राजनीतिक रूप से करीबी या रिश्तेदार बताना उचित नहीं माना जा सकता।
वहीं, दूसरी तस्वीरों में कांग्रेस शासन के दौरान चंदू राजा राजपूत तत्कालीन कांग्रेस विधायक तरवर सिंह लोधी के साथ दिखाई दे रहे हैं। इन तस्वीरों में उनका स्वागत और कांग्रेस नेताओं के साथ मेलजोल भी नजर आता है।
इसके अलावा, बंडा के वर्तमान विधायक वीरेंद्र सिंह लम्मडदार से भी चंदू राजा राजपूत की मुलाकातें होती रही हैं। उनकी विधायक के साथ मुलाकातों की तस्वीरें भी सामने आने की बात कही जा रही है। इससे यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि अलग-अलग राजनीतिक दौर में चंदू राजा राजपूत के संपर्क किन-किन नेताओं और राजनीतिक लोगों से रहे हैं। हालांकि, केवल मुलाकात या तस्वीर के आधार पर किसी व्यक्ति को किसी नेता का करीबी अथवा राजनीतिक सहयोगी बताना उचित नहीं होगा।
इसके बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। इसी दौरान चंदू राजा राजपूत की मुलाकात वर्तमान मंत्री गोविंद सिंह राजपूत से होने की तस्वीरें भी सामने आई हैं। यही तस्वीरें अब इस पूरे मामले को एक अलग दिशा में ले जा रही हैं।
सत्ता के साथ बदलती रहीं नजदीकियां?
तस्वीरों को क्रम से देखने पर इतना जरूर सामने आता है कि अलग-अलग राजनीतिक दौर में चंदू राजा राजपूत की अलग-अलग दलों और नेताओं के लोगों से नजदीकियां रही हैं। ऐसे में किसी एक नेता का करीबी अथवा किसी मंत्री का रिश्तेदार बताकर पूरे मामले को राजनीतिक रंग देना सवाल खड़े करता है।
खास बात यह है कि वर्तमान में चंदू राजा राजपूत को लेकर चल रही बयानबाजी कहीं दो राजनीतिक नेताओं को आमने-सामने लाने का माध्यम तो नहीं बन रही—यह सवाल भी अब उठने लगा है।
तस्वीरें बहुत कुछ कहती हैं, लेकिन निष्कर्ष जांच से ही
किसी व्यक्ति की किसी नेता के साथ तस्वीर होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह व्यक्ति उस नेता का करीबी, रिश्तेदार या राजनीतिक सहयोगी है। इसलिए पूरे मामले में तस्वीरों और बयानों के आधार पर राजनीतिक निष्कर्ष निकालने के बजाय प्रशासनिक जांच के तथ्यों को सामने रखना ज्यादा उचित होगा।
बंडा शराब प्रकरण में यदि कोई व्यक्ति दोषी है तो जांच के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन बिना ठोस प्रमाण के किसी व्यक्ति को किसी नेता का रिश्तेदार या करीबी बताकर राजनीतिक विवाद खड़ा करना उचित नहीं कहा जा सकता।
अब सवाल यही है कि चंदू राजा राजपूत की वास्तविक राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि क्या है और अलग-अलग राजनीतिक दौर में उनकी नजदीकियां किन कारणों से रहीं? इसका स्पष्ट जवाब निष्पक्ष जांच और तथ्यों के सामने आने के बाद ही मिल सकेगा।

